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हम भी पढ़ेंगे...

आओ स्कूल चले हम..ये स्लोगन अब तक बड़े-बड़े होर्डिंग और सार्वजनिक स्थानों की दीवारों की शोभा बढ़ाया करते थे.और इस स्लोगन को कोरा साबित करता..वहीं पर कचरा उठाते मासूम और नन्हें वे बच्चे..जो स्कूल तो जाना चाहते हैं...लेकिन कुछ मजबूरी वश नहीं जा पाते...देश में गरीब वर्ग के बच्चों को भी अच्छी शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से शिक्षा का मौलिक अधिकार कानून लागू किया गया है..जो ऐसे बच्चों के लिए मील का पत्थऱ साबित हो सकता है..संविधान का 86वां संशोधन वर्ष 2002 में पास हुआ और कानून 2009 में बनकर एक अप्रैल 2010से लागू हुआ.... भारत अब उन कुछ चुनिंदा देशों में आ गया, जहां शिक्षा सभी के लिए मूलभूत अधिकार है और 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त अनिवार्य शिक्षा दिया जाएगा..लेकिन लोगों का इससे जुड़ाव तभी बनेगा जब सरकारी तंत्र सबको शिक्षा दिलाने के प्रति अपनी इच्छाशक्ति और ईमानदारी दिखाएगा..प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने राष्ट्र को संबोधित कर यह संदेश देने को कोशिश की है कि सरकार इसे लेकर बेहद गंभीर है..गौरतलब है कि इस कानून के जरिए मुफ्त और अनिवार्य बुनियादी शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दे दिया गया है..इसके तहत अब 6 से 14 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा मुहैया कराई जाएगी..6-14 साल तक के बच्चों के लिए मुंफ्त व अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित कराने वाले इस कानून के बारे में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने भी माना कि चुनौतियां कई हैं..उनके मुताबिक सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना बड़ी चुनौती है..इसीलिए अब हर राज्य के शिक्षा सचिवों को अलग-अलग बुला कर उनसे मशविरा किया जाएगा...कानून पर पूरी तरह अमल के लिए तीन साल का समय है... इसके लिए मंत्रालय ने सरकार से चालू वित्त वर्ष में 30 हजार करोड़ रुपये मांगे थे...लेकिन सिर्फ 15 हजार करोड़ रुपये मिले हैं....वैसे, वित्त आयोग से भी राज्यों को अगले पांच वर्ष के लिए 2500 करोड़ रुपये मिले हैं...कानून पर अमल के लिए अगले पांच साल में 1.71 लाख करोड़ रुपये चाहिए...अच्छी बात यह है कि गुरुवार को इस कानून के बारे में टेलीविजन के जरिए लोगों को जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने यह साफ कर दिया कि इसके लिए धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी...देश में प्रधानमंत्री ने पहली बार कोई कानून अमल में आने के मौके पर राष्ट्र को संबोधित किया है..कानून में प्रावधान है कि एक कक्षा में सिर्फ 30 छात्र होंगे और हर 30 छात्र पर एक शिक्षक का इंतजाम होगा....इस हिसाब से पांच लाख शिक्षक व इतने ही अतिरिक्त क्लासरूम चाहिए..नया कानून प्रशिक्षित शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी देता है....ऐसे में पूर्व नियुक्त पैरा टीचर्स को प्रशिक्षित करना होगा...प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि शिक्षा के लिए कोई कोशिश तभी कामयाब होगी, जब हमारे पास योग्य और समर्पित शिक्षक होंगे...कानून में पड़ोस में स्कूल की बात कही गई है....सरकार ने एक किमी के दायरे में प्राइमरी व तीन किमी के दायरे में अपर प्राइमरी स्कूल होने का नियम बनाया है...बच्चों के गाव की दहलीज पर स्कूल हों और उन्हें पढ़ने के लिए दूरदराज न जाना पड़े...यह बात सुनने में बहुत ही आश्वस्ति देती है, लेकिन देश के दूरदराज इलाकों में शिक्षा का परिदृश्य और वहा की जमीनी हकीकत क्या किसी से छुपी हैं...इस और भी सरकार को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.

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