लाखों दिलों पर राज करने वाले गजल सम्राट हम सभी को अलविदा कह गए..गजल की दुनिया का चमकता-दमकता सितारा हमारे बीच से चला गया..हमेशा के लिए जगजीत सिंह हमें छोड़ गए..लेकिन अपने गीतों के बीच वे अमर हो गए हैं.. होठों से छू लो तुम..., ये दौलत भी ले लो..., होशवालों को खबर क्या..., हजारों ख्वाहिशें ऐसी..., हाथ छूटे भी तो..., जैसे अनगिनत सुरीली गजलों को आवाज देने वाले जगजीत सिंह अब नहीं रहे..ब्रेन हमरेज से जूझ रहे जगजीत सिंह का आठ बजकर 10 मिनट पर देहांत हो गया है..जगजीत सिंह के निधन के साथ ही मौसिकी की दुनिया का एक कालखंड समाप्त हो गया..प्रख्यात गजल गायक जगजीत सिंह ने अपनी मखमली आवाज के जरिए गजलों को नया जीवन दिया..वह अपने जीवन के70वें साल का जश्न अनोखे ढंग से मनाना चाहते थे..उनकी इस साल 70 संगीत समारोहों में शिरकत करने की हसरत थी लेकिन सोमवार को अपने निधन से पहले तक वह केवल 46 संगीत समारोहों में ही शामिल हो सके थे.. सिंह ने पंडित छगनलाल शर्मा और उस्ताद जमाल खान से संगीत की शिक्षा ली थी..उनकी गजल व भजन गायन की अलग शैली ने उन्हें बहुत जल्दी जाना-पहचाना नाम बना दिया, 70 व 80 के दशक में उनक...
अफसानें होते हैं... सुनने और सुनाने के.. पढ़ने और पढ़ाने के... आपका, मेरा मेरी जिंदगी का... मेरी पत्रकारिता का... यह अफसाना कहता हूँ सुनाता हूँ जो खोया है वो बताता हूँ कहां-कहां से ढूँढ़ता हूँ मिलते हैं जहाँ जहाँ से सिर्फ-सिर्फ अफसानें हमारे तुम्हारे मिलते हैं मुस्कुराते हैं अफसाने और कुछ कह जाते हैं अफसाने