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मि. नटवर की हाईटेक ठगी...मीडिया को भी गुमराह करने की कोशिश


इन जनाब को गौर से देखिए..यह जनाब हैं...राहूल मुखर्जी..जो किसी नटवरलाल से कम नहीं है....इन्होंने फर्जी आयकर विजिलेंस अधिकारी बन रिश्तेदारों समेत दर्जनभर लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की धोखाधड़ी की है....पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद भी यह मीडिया को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था..पहले तो इसने अपनी प्रेमिका को विवाहित होना बताकर अपनी प्रेमिका का नाम मीडिया में नहीं लाने का आग्रह किया...इस नटवर लाल के मुताबिक अगर उसकी प्रेमिका का नाम मीडिया में सामने आ गया तो उसकी विवाहित जिंदगी बर्बाद हो जाएगी...लेकिन जब बिलासपुर में रहनेवाली उसकी प्रेमिका की जांच-पड़ताल की गई तो वह महिला विवाहित नहीं निकली...यह नटवर लाल मीडिया को भी गुमराह करने की कोशिश कर रहा था...इसके इस काम में उसकी प्रेमिका की संलिप्ता पाई गई है...हाईटेक ठगी के लिए  बकायदा यह चार महंगी कारें जिसमें पीली बत्ती लगी हुई थी..में घुमा करता था....दरअसल उसने ठगी की वारदात को अंजाम देने के लिए अपनी मानसिकता बना ली थी और पीली बत्ती लगे कार में घुमकर वह अपने रिश्तेदारों और कुछ अन्य परिचित के लोगों जिनकी संख्या दर्जनभर के करीब है को शासकीय नौकरी दिलाने के नाम पर झांसे में ले लिया...
पीली बत्ती और उसकी शान-शौकत को देखकर लोग झांसे में भी आ गए...और शासकीय नौकरी की चाहत में उसके हाथों में नकदी रकम सौंपते चले गए...इसके पिता की एक साल पहले सड़क हादसे में मौत हो चुकी है...वे रेलवे में थे...जब एक साल पहले अपने पिता की दुर्घटना की रिपोर्ट थाने में लिखाने गया तो उस समय भी अपने आप को विजिलेंस कमिश्नर बताकर पुलिस पर रौब दिखाया था..इसने दिसंबर 2007 से अपने आप को विजिलेंस अधिकारी बताना शुरू किया..इसने लोगों को झांसे में लेकर यह प्रचारित किया कि इसका सलेक्शन यूपीएससी में हो गया है..औऱ अब ये विजिलेंस अधिकारी बन गया है...इसके जरिए इसने अपने रिश्तेदारों को ठगना शुरू किया...औऱ उनको नौकरी का फर्जी नियुक्ति पत्र दिखाकर झांसे में लिया...फर्जी विजिलेंस अधिकारी राहुल मुखर्जी ने अपने पड़ोसी उमेश व उसके रिश्तेदारों को तो झांसे में लिया ही और उनसे लाखों रुपए भी वसूल लिया...पर उसने पैसों की लालच में अपने रिश्तेदारों तक को नहीं बख्शा..बताया जा रहा है कि आरोपी ने अपने दो ममेरे भाईयों अभिजीत चटर्जी से 2 लाख, सोमेन्द्र चटर्जी से 75 हजार, मौसेरे भाई शांतनु मुखर्जी से ढ़ाई लाख के अलावा तीन अन्य वाय. नागेश राव से डेढ़ लाख, सुरेन्द्र पाल से 45 हजार और नरेन्द्र दास मोवा निवासी से नौकरी दिलाने के नाम पर 3 लाख रुपए ऐंठा था..उमेश को उसने झांसा दिया कि वह उसे अपना निज सहायक के पद पर पदस्थ करेगा, रितेश को आयकर विभाग में और राजेश को रेलवे में डीजल इंजन चालक के पद पर नियुक्त कराएगा..
फर्जी विजिलेंस अधिकारी बनकर लाखों रुपए की ठगी करने के आरोप में दबोचे गए आरोपी राहुल के पिता अंजन मुखर्जी रायपुर एलॉयज में कार्यरत् थे..7 अगस्त 08 में एक सड़क हादसे के दौरान उनकी मौत हो गई थी..उनके मौत के बाद उनकी पत्नी को 12 लाख रुपए मिले थे..स्वाभाविक रूप से आरोपी के पिता को इस बात की शायद जानकारी नहीं थी, उनका बेटा उन्हें धोखे में रखकर लोगों को ठगने का काम कर रहा है..आरोपी की मां शालिनी मुखर्जी को आज भी इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा है कि उनके बेटे ने चार सौ बीसी कर लाखों रुपए झटके हैं...उसके प्रभाव में आकर झांसे में आए उमेश और रितेश को जब संदेह हुआ तो उन्होंने 31 अगस्त को पहली बार उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई..खुद को बचाने के लिए उसने 3-4 चेक भी दे दिया था, लेकिन वह भी बाउंस हो गया...आरोपी ने अपने व प्रेमिका प्रीता के नाम से संयुक्त खाता आईसीआईसीआई बैंक में खुलवाया था और चेक भी वह उसी खाते का जारी किया था..चेक बाउंस होने के बाद 19 सितम्बर को उमेश ने आरोपी राहुल के खिलाफ ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई..उसके बाद पुलिस हरकत में आ गई थी लेकिन वह फरारी काट रहा था...उमेश के भाई रितेश के लिए उसने खुद पीएससी का फार्म खरीदा और उसे जमा कराया..उसके बाद उसने उसे परीक्षा में शामिल होने की भी जरूरत नहीं बोल दिया और 27 मई 09 को आयकर विभाग में पदस्थ किए जाने की नियुक्ति पत्र भी लाकर दे दिया और 1 जुलाई को बिलासपुर में पदभार लेने के लिए बोला..रितेश पदभार लेने बिलासपुर जाता उससे पहले ही उसने उसे फिर झांसे में लिया और बोल दिया कि इससे अच्छे विभाग में वह उसे दिल्ली में पदस्थ करेगा जिसके लिए उसकी वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत हो गई है और कुछ समय बाद वह अपने साथ दिल्ली लेकर जाएगा....ग्लैमर औऱ चकाचौंध की दुनिया में अंधा होकर इसने ठगी का रास्ता अख्तियार किया...और रिश्तेदारों समेत दर्जनभर लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की धोखाधड़ी की...पुलिस और मीडिया के सामने इसकी हर बात में नटवरलाल झलकती थी...बहरहाल यह नटवरलाल ठग अपने किए के कारण सलाखों के पीछे पहुँच चुका है...

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