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कब रूकेगा खिलाड़ियों की जिंदगी से खिलवाड़......

हमारे देश में खिलाड़ियों का तब तक ही दबदबा है....जब तक वे अपने उम्दा खेल का प्रदर्शन कर रहे होते हैं..लेकिन जब ये खिलाड़ी अपने खेल को बाय बोलते हैं...तो उन्हें भी हमारी सरकार बाय बोल देती है..सुविधा के नाम पर केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के पास ढेर सारी योजनाएं हैं...लेकिन इनकी जमीनी हकीकत कुछ औऱ ही है...समय-समय पर ऐसे उदाहरण हमारे सामने आते रहते हैं..ताजा उदाहरण तो ओलंपिक में एथलेटिक्‍स में भारत के लिए पदक जीतने वाली धावक पीटी ऊषा का ही है...लेकिन इससे भी भयावह एक ऐसी खिलाड़ी की दास्तां है..जो जिंदगी की थपेड़ों में ऐसी उलझी की उसे देह-व्यापार के धंधे में धकेल दिया गया..और इस खिलाड़ी की सुध लेने वाला कोई नहीं है..यह खिलाड़ी कोई मामूली खिलाड़ी नहीं है..यह हाईजम्प और लॉग जम्प की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी है..जिसने देश में ही नहीं देश के बाहर भी जाकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया....और कई मैडल अपने इस वतन के लिए जीतें.....आखिर हमारे खिलाड़ी गुमनामी में क्यों खोते जा रहे हैं..इस सवाल का जबाव शायद किसी के पास नहीं है....

देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों का एक खास मुकाम है...जिन्हें सरकार एकाध बार सम्मानित करके भूल जाती है..लेकिन ये खिलाड़ी उस गुमनामी में चले जाते हैं...जहां उन्हें पूछने वाला कोई नहीं होता...हमारे खिलाड़ियों के साथ ऐसे वाक्ये सामने आते रहते हैं...ओलंपिक में एथलेटिक्‍स में भारत के लिए पदक जीतने वाली धावक पीटी ऊषा पांच अक्टूबर को जब भोपाल पहुंची तो अपना अपमान देख उन्‍हें काफी बुरा लगा...अपने अपमान से वो इतनी आहत हुईं कि मीडिया के सामने ही वो रो पड़ीं...भारतीय खेल प्राधिकरण साई क्षेत्र केन्द्र के हॉस्‍टल और प्रशिक्षक निवास के उद्घाटन समारोह में पीटी ऊषा को आमंत्रित किया गया था...कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश एथलेटिक्स एसोसिएशन ने किया था..एयरपोर्ट पर कोई लेने नहीं पहुंचा..किसी तरह पीटी ऊषा केंद्र पहुंच गईं, लेकिन वहां भी उनके ठहरने का कोई खास इंतजाम नहीं था..केंद्र के अधिकारी केन्द्रीय खेल और युवा मामलों के मंत्री एमएस गिल के स्‍वागत की तैयारियों में जुटे हुए थे...ये सब देखकर पीटी ऊषा को बहुत बुरा महसूस हुआ..जब उन्‍हें बर्दाश्‍त नहीं हुआ तो मीडिया के सामने वो रो पड़ीं..उन्होंने कहा कि खेल में भारत का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए..वो ऐसे व्‍यवहार से काफी आहत महसूस कर रही थीं..लेकिन इससे भी भयावह एक ऐसी खिलाड़ी की दास्तां है..जो जिंदगी की थपेड़ों में ऐसी उलझी की उसे देह-व्यापार के धंधे में धकेल दिया गया..और इस खिलाड़ी की सुध लेने वाला कोई नहीं है..जब इस खबर की मैंने रिपोर्टिंग की थी...तो मुझे काफी दुख हुआ था...छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जिस्मफरोशी के धंधे में अगस्त में पकड़ी गई एक लड़की हाईजम्प और लॉग जम्प की राष्ट्रीय खिलाड़ी निकाली.. यह युवती है..रीमा (परिवर्तित नाम)...जिसने जिंदगी भर अपना सब कुछ खोया ही है....जिंदगी से इसे ठेरों शिकायतें हैं..मां की कोख से धरती पर आई तो पिता का साया जाता रहा...बड़ी हुई तो प्रदेश असम का नाम रौशन किया...एक फुटबॉल खिलाड़ी से उसकी शादी भी हुई...लेकिन शादी के आठ साल बाद ही वह भी उसे छोड़ गया..फिलहाल रीमा अपनी सात साल की बच्ची के सहारे जिंदा है....लेकिन प्रदेश का नाम रौशन करने के बाद भी उसे प्रदेश सरकार से कोई सहायता नहीं मिली....ऐसे में अपनी और अपनी बेटी की जीविका चलाने के लिए वह इस दलदल में आ धंसी....हम कितना भी दम भर लें....लेकिन हमारे देश के खिलाड़ी उचित सुविधाएं नहीं मिलने के कारण हमेशा रूसवाई का शिकार होते हैं..लेकिन इसका जिम्मेदार कौन है..आप इसका बखूबी अंदाजा लगा सकते हैं...

Comments

rajeev bhai,

bahut hi aachchha likh rahe ho.

is story men kaamal likha hai tumne...

plz see

http://dongretrishna.blogspot.com

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