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हाय रे मीडिया

मीडिया..सस्ती लोकप्रियता का एक साधन...जो चाहे किसी को हीरो बना दे..या चाहे तो किसी को हीरो से जीरो...इस साधन का उपयोग हर कोई भरपूर उठाना चाहता है..चाहे वह..राजनेता हो...चाहे वह अभिनेता...या फिर कोई भी...हर कोई इसकी चकाचौंध के दीवाने हैं..दीवाने भी ऐसे की पूछो मत..जो सस्ती लोकप्रियता की चक्कर में सारी हदों को पार करने को तैयार हैं...एक ऐसे ही दीवाने ने सस्ती लोकप्रियता को हासिल करने के लिए अपने अपहरण की मनगढ़त कहानी रच डाली..अपहरण की यह कहानी क्लाइमेक्स पर भी पहुँची...इसे मीडिया ने खूब तवज्जो दिया....इलेक्ट्रानिक मीडिया ने इस कहानी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश भी किया....अगले दिन यह कहानी अखबारों की सुर्खियां भी बनी...राजधानी पुलिस पर सवालिया निशान लगे...चक्काजाम हुआ...प्रशासन को अल्टीमेटम मिला...20 घंटे का ड्रामा सभी को रोमांचित करने वाला था...लेकिन जब मीडिया ने अपहरण की खाल उधेड़नी शुरू की...तो सस्ती लोकप्रियता पाने वाला शख्स आज खुद सलाखों के पीछे पहुँच गया...हाय रे मीडिया...दबे जबान यह शख्स इस बात को स्वीकार करता है...
दशहरा की रात देवेन्द्र नगर के एक युवा व्यवसायी जी नागेश के पहले लापता होने और उसके बाद अपहरण के सनसनीखेज मामले से न केवल पुलिस की नींद उड़ गई बल्कि पूरी राजधानी में अपहरण कांड चर्चा का विषय बन गया.युवा व्यवसायी का कांग्रेस दल से भी संबंध है जिसके चलते कांग्रेसियों ने पुलिस पर दबाव बनाने के लिहाज से चक्काजाम कर 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए राजधानी बंद की चेतावनी तक दे डाली..करीब 10 दिनों तक सुर्खियों में रहे अपहरणकांड का खुलासा करने के साथ ही पुलिस ने बताया कि नागेश ने अपने अपहरण की कहानी खुद ही रची थी..इसके पीछे कारण नागेश के बयान के आधार पर पुलिस बता रही है कि नागेश को जान से मारने की धमकी मिली थी जिसके चलते वह खुद को बचाने के फिराक में पैदल ही शहर से बाहर चला गया और दूसरे दिन शाम तक जब पुलिस उसकी तलाश में चारों दिशाओं में पुलिस की 10 टीमों की रवानगी कर चुकी थी वह पैदल ही सिमगा थाने पहुंच गया... सिमगा थाने जाकर उसने देवेन्द्र थाने रायपुर में सूचना देने के लिए कहा और इस तरह से वह पुलिस कस्टडी में ले लिया गया...देर रात जब पुलिस ने नागेश को रायपुर लाया और पत्रकारों से मुखातिब कराया तो अपने अपहरण की झूठी कहानी बता दी....पहले दिन तो मीडिया ने भी अपहरण की कहानी को बताए मुताबिक ही प्रस्तुत किया लेकिन फर्जीवाड़े की सच्चाई दूसरे दिन से ही मीडिया ने उछालनी शुरू कर दी थी जिसके चलते पुलिस को और भी ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ा और 10 दिनों तक पुलिस जूझती रही....अपने ही अपहरण की झूठी कहानी बताकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश में लगे नागेश से लगातार पूछताछ के बाद मामले का खुलासा किया गया..आरोपी नागेश ने दुर्गा विसर्जन वाली रात से दूसरे दिन तक की एक और कहानी बताई जिसे पुलिस तो सच मान रही है पर सही मायने में सच क्या है और झूठ कितना है अभी भी जांच के दायरे में ही आता है....

नागेश के मुताबिक 17 सितंबर को पंडरी में उसके दोस्त धीरज के साथ झगड़ा हो गया था.उसकी सूचना पर अपने एक अन्य दोस्त बंटी होरा के साथ वह मौके पर गया और दोनों पक्षों के बीच में जमकर मारपीट हुई उसके बाद पुलिस पहुंची और रिपोर्ट दर्ज कराया गया..दूसरे दिन बादल रक्सेल अपने 40-50 लोगों के साथ बाइक में दुर्गा पंडाल में मुंह पर कपड़ा बांधकर आया था और तलवार लहराकर जान से मारने की धमकी देकर निकल गया था..इस पर उसने देवेन्द्र नगर थाने में उसके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई है..विसर्जन के दिन उसके एक दोस्त आकाश साहू ने बताया कि महादेव घाट में उसको मारने के लिए इंतजार हो रहा है..रात में जुलूस के दौरान दोस्तों ने उसे घर चले जाने की सलाह दी लेकिन वह साथ ही चलता रहा..उसके दिमाग में बात कौंध गई थी और वह भीड़ से चुपचाप निकल गया ताकि किसी को भी जानकारी नहीं लगे कि वह कहां गया है...इस पूरे मामले में लापता होने से लेकर अभी तक में अपहरण कांड की धुरी नागेश और दुर्गेश ही रहे हैं..अपहरण की कहानी जब नागेश ने गढ़ी है तो उसके पहले ही दुर्गेश को कैसे मालूम था..पुलिस के सामने दुर्गेश को चश्मदीद बनाकर पेश किया गया और उसने पुलिस के सामने स्वीकार भी किया कि वह उसका अपहरण होते हुए देखा है..पर जैसे ही नागेश वापस आया और दो दिनों बाद जब दुर्गेश से पुलिस ने दोबारा पूछताछ की तो उसने बयान बदल दिया और अपहरण कांड ने फिर दूसरा मोड़ ले लिया..कथित चश्मदीद के मुताबिक किसी सलीम नाम के शख्स ने अपहरण होते हुए देखे जाने की बात को कहने के लिए कहा और उसने कह भी दिया..उसका यह भी कहना है कि सलीम को वह पंडाल में मिला था और 4-5 दिनों पहले ही उससे परिचित हुआ था..अब सवाल यह है कि नागेश ने जो कहानी गढ़ी है वह सलीम को कैसे पता जबकि नागेश खुद कह रहा है कि उसने सिमगा थाने में अपहरण की कहानी को गढ़ा है जब उसे पता लगा कि राजधानी में उसके अपहरण की चर्चा है..सलीम ने दुर्गेश को ही क्यों इस्तेमाल किया, इसके पीछे कारण क्या था..सलीम का अपहरण की कहानी में क्या रुचि थी..
 
पुलिस यह मान रही है कि नागेश ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है इसलिए मामले का पटाक्षेप भी माना जा रहा है....पर मीडियाकर्मी अब भी संशय की स्थिति में हैं....पुलिस और नागेश ने आज जितना भी कुछ कहा है मीडिया के सामने अधूरा सच है और चर्चा अब भी इसी बात की है, आखिरी सच को किन कारणों से छिपाया जा रहा है....अपहरण कांड के सूत्रधार और आरोपी जी नागेश कांग्रेस से संबंधित है, वहीं उसके पिता जी. स्वामी शहर के रसूखदार होने के साथ ही प्रदेश सरकार के एक मंत्री के खासमखास भी हैं...नागेश के लौटने के बाद उसके पिता ने पुलिस अधिकारियों के दफ्तर के कई चक्कर भी लगाए हैं, इन सबको देखते हुए यह माना जा रहा है कि अपहरण की कहानी का इस तरह से पटाक्षेप किया जाना कहीं न कहीं राजनीतिक दबाव से प्रेरित है....हालांकि सारी बातें दबी जुबान से कही जा रही है, पुलिस मामले का पटाक्षेप करने के बाद चैन की सांस ले रही है....पर पुलिस को भी यह ध्यान रखने की जरूरत है कि इससे उनकी विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लग रहे हैं....पूरे अपहरण कांड की कहानी खुद ही रचने वाले नागेश को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और उसके बयान को दर्ज कर लिया है....इसके साथ ही कथित चश्मदीद दुर्गेश के बयान को कलमबंद किया गया है....उसके मुताबिक सलीम ने उसे अफवाह को फैलाने के लिए कहा था....अब इस मामले में सलीम की तरफ निगाहें टिकी हुई हैं और माना जा सकता है कि शायद उसके आने के बाद फिर एक नई कहानी खुलकर सामने आएगी या फिर यह भी संभव है कि जिस सलीम की बात की जा रही है वह किसी और नाम से सामने आए वह भी नई कहानी के साथ....फिर भी इंतजार बाकी है ताकि झूठ के इस पुलिंदे का वजन और ज्यादा किया जा सके....लेकिन इन सबके बावजूद इस मामले में  जो बात गौर करने वाली है..वह यह कि कि सस्ती लोकप्रियता की चाहत में इस शख्स ने यह पूरी कहानी रची...

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