Skip to main content

लाइव एनकाउंटर ऑन द टेलीविजन !

आज की नई पीढ़ी कल्पना में जी रही है...फेंटेसी में यह नई-नई कहानियां बुनते रहते हैं...कभी स्पाइडर मैन...कभी सुपर मैन बनकर यह दूसरों से लड़ते हुए अपने-आप को सपने में देखते हैं..लेकिन जब सपना टूटता है..तो इन्हें अपने हकीकत का एहसास होता है....लेकिन कभी-कभी सपनों को यह हकीकत का अमलीजामा पहनाने की कोशिश करते हैं...जिसके कारण ये सलाखों के पीछे भी पहुँच जाते हैं...ऐसा ही कुछ हुआ है..रायपुर के स्कूली छात्र सुमेर सिंह के साथ...जो इसी फेंटेंसी करेक्टर की चक्कर में आज पुलिस की गिरफ्त में पहुँच चुका है..दरअसल यह महोदय एक न्यूज चैनल दफ्तर पहुँचकर खुद को सीबीआई एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बता रहे थे..इनके मुताबिक अब तक 28 एनकाउंटर करने के बाद इन्हें कोलकाता से छत्तीसगढ़ में नक्सली एनकाउंटर करने के लिए भेजा गया है...पुलिस को जब इसकी सूचना मिली तो उनके होश गुम हो गए..गिरफ्तारी के बाद सारा माजरा समझ में आया...पुलिस ने मीडिया बनकर इस सीबीआई एनकाउंटर स्पेशलिस्ट को पकड़ा...


अब तक छप्पन, शूटआऊट एट लोखणंडवाला....जैसी फिल्मों से इंस्पायर यह जनाब खुद को सीबीआई एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बताते हैं..इन्हें नक्सलियों का लाइव एनकाउंटर करने कोलकाता से यहां भेजा गया है...एनकाउंटर को लाइव शूट कराने एक निजी चैनल के दफ्तर पहुंचे नकली सीबीआई अधिकारी को लाइटर गन के साथ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है....एनकाउंटर की बात सुनने के साथ ही एक बारगी राजधानी पुलिस के आला अधिकारी भी सकते में आ गए थे, लेकिन चैनल के दफ्तर पहुंचने के बाद मामला पुलिस अधिकारी के समझ में आ गया और बतौर चैनल संचालक बन उन्होंने फर्जी सीबीआई अधिकारी को ही झांसे में लेकर गिरफ्तार कर लिया....राजधानी पुलिस को एक निजी चैनल से खबर मिली कि उनके पास खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाला एक युवक उनके दफ्तर पहुंचा है...वह खुद को एनकाउंटर विशेषज्ञ कह रहा है और अब तक 28 एनकाउंटर करने के बाद कोलकाता से लौटकर छत्तीसगढ़ में नक्सली एनकाउंटर करने के लिए भेजा जाना बता रहा है....इस बात की खबर एएसपी शशिमोहन सिंह को निजी चैनल के माध्यम से मिली और बताया गया कि उसके हाथ में एक पिस्टल भी है साथ ही वह चाह रहा है कि उसके एनकाउंटर को लाइव शूट किया जाए....सकते में आए राजधानी पुलिस के एएसपी शशिमोहन सिंह चैनल के दफ्तर गए तब तक सीबीआई अधिकारी वहां से दफा हो चुका था...एएसपी शशिमोहन सिंह ने चैनल के संचालक के तौर पर उसके नंबर पर संपर्क साध उसे झांसे में लेकर वापस दफ्तर बुलवाया....एएसपी के सामने पहले तो उसने अपना नाम सुमीत सिंह बताया और कोलकाता से आना बताया..उसके पास पिस्टल देखते ही शशिमोहन सिंह को समझते देर नहीं लगी कि उसकी बातों में कितनी सच्चाई है....उसके बाद एएसपी शशिमोहन ने अपना पुलिसिया हथकंडा अपनाया तो राज खुल कर सामने आ गया...एडीशनल एसपी शशिमोहन सिंह ने बताया कि सुमेर कटोरातालाब का रहने वाला है...12वीं की परीक्षा में उसे सप्लीमेंट्री आई है...असली जैसी लगने वाली पिस्टल लेकर टीवी चैनल के दफ्तर पहुंचे इस युवक ने खुद का परिचय सीबीआई के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में दिया...उसने बताया कि वह अब तक 28 एनकाउंटर कर चुका है....

युवक के ऐसा करने के पीछा क्या उद्देश्य था अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन अफसरों का मानना है कि वह पब्लिसिटी पाने के शायद वह ऐसा कर रहा होगा...पुलिस को आरोपी ने अपना नाम भी गलत बताया था...उसकी करतूत में साथ देने के संदेह में पुलिस उसके दोस्त और रिश्तेदारों की तलाश कर रही है....युवक ने कबूल किया है कि नकली पिस्टल रविभवन की एक दुकान से 380 रुपए में खरीदी थी..असली जैसी लगने वाली पिस्टल का इस्तेमाल क्राइम में लगातार बढ़ते जा रहा है..लिहाजा फेंटेसी करेक्टर और ऐसी नकली बंदूक की आड़ में यह युवक अब तक क्या-क्या गुल खिलाया होगा...इसका अंदाजा लगाया जा सकता है....

Comments

Popular posts from this blog

मीडिया को भी अन्नागीरी की जरूरत

भ्रष्टाचार..एक ऐसी समस्या जिसका हल ढूंढते नजर आ रहे हैं..वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं गांधीवादी नेता अन्ना हजारे..लेकिन क्या दीमक की तरह खोखला कर रहे इस देश को भ्रष्टाचार रूपी कीड़े से बचाया जा सकता है..जिसने अपना पैर पुरजोर तरीके से लोकतंत्र के सभी स्तंभों में जमा लिया है..हमारा देश लोकतांत्रिक देश है..लोकतंत्र..एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें जनता अपना शासक खुद चुनती है..और जहां लोगों को जीने की आजादी हो और लोगों के अधिकारों का हनन न हो... लोकतंत्र के तीन मुख्य स्तम्भ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका और लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप में सर्वजन ने प्रेस अर्थात मीडिया को स्वीकार किया है..लेकिन क्या भारत में ये सारे स्तंभ सही रूप से काम कर रहे हैं..क्या भ्रष्टाचार ने सिर्फ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को ही जकड़ा है..मीडिया क्या इससे अछूता है..शायद नहीं..मीडिया में भी भ्रष्टाचार उतना ही व्यापत है..जितना लोकतंत्र के बाकी स्तंभों में..ऐसे में पुरजोर तरीके से भ्रष्टाचार की आवाज उठाने वाले तथाकथित लोकतंत्र के इस स्तंभ के लिए भी एक ड्राफ की जरूरत है..जिसके जरिए भ्रष्टाचार में...

आई एम इन हांटेड

भारत में गिनी-चुनी 3-डी फिल्में बनी हैं..अब थ्री-डी फिल्मों का दौर फिर शुरू हो गया है इसलिए वर्षों बाद हांटेड नामक 3-डी फिल्म जब सामने आई..तो इसे देखे बिना मैं नहीं रह सका...लेकिन इस फिल्म के देखने के साथ ही मेरे साथ ही इस फिल्म की पटकथा जैसी कुछ घटना घटी..जिसकी वजह से मैं उसे पल को शब्दों में बांध कर सहजने की कोशिश कर रहा हूँ...दरअसल इस फिल्म में नायक नायिका को बचाने के लिए अस्सी साल पहले जाता है.और अपनी जिंदगी को दांव पर लगाकर नायिका की जिंदगी संवार देता है..इस फिल्म को देखने के बाद मन में उतना भय तो नहीं हुआ..लेकिन फिल्म देख कर जब मैं बाहर निकला तो आसमान में गरजते-घुमरते बादलों से जमीन पर गिर रही बूंदों ने मन में जरूर भय पैद कर दिया..बेमौसम बारिश से जहां मई की चिल्लाती धूप से राहत मिली...वहीं मुझे यह भी खराब लग रहा था कि काफी मेहनत कर आज अपने रूम की सफाई करने के बाद कपड़े, जूत्ते, चादर और गद्दे धूप में डालकर फिल्म देखने आया था..मुझे यहां हांडेट के नायक से ईर्ष्या भी हो रही थी कि मैं भी नायक की तरह कुछ पल पीछे चला जाता और अपने मेहनत को इस तरह बारिश की बूंदों में बरबाद नहीं होने द...

बॉडीगार्ड एक प्रेम कहानी

फिल्म बॉडीगार्ड एक प्रेम कहानी है..और इसका क्लाइमैक्स काफी दमदार है..इस फिल्म को सलमान की एक्टिंग और एक बेहतरीन क्लाइमैक्स के लिए जाना जाएगा..फिल्म में लवली सिंह एक बॉडीगार्ड है और वह एक ही एहसान चाहता है कि उस पर किसी किस्म का एहसान ना किया जाए..उसे दिव्या की रक्षा का जिम्मा सौंपा जाता है..परछाई की तरह लवली उसके साथ लग जाता है और इससे दिव्या परेशान हो जाती है..लवली से छुटकारा पाने के लिए दिव्या फोन पर छाया बनकर लवली सिंह को प्रेम जाल में फांसती है..लवली भी धीरे-धीरे छाया को बिना देखे ही चाहने लगता है..किस तरह से दिव्या अपने ही बुने हुए जाल में फंस जाती है यह फिल्म का सार है..कुछ बढ़िया एक्शन दृश्यों के बाद प्रेम कहानी शुरू हो जाती है..फर्स्ट हाफ तक तो ठीक लगता है, लेकिन इसके बाद यह खींची हुई लगने लगती है..लेकिन क्लाइमेक्स में कई उतार-चढ़ाव आते हैं जिससे दर्शक एक बार फिर फिल्म से बंध जाता है..फिल्म के अंत में कई संयोग देखने को मिलते हैं, और एक सुखद क्लाइमैक्स भी..कहानी कई सवाल उठाती हैं, जिसमें सबसे अहम ये है कि दिव्या जब सचमुच में लवली को चाहने लगती है तो वह असलियत बताने में इतना वक्त...